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हिन्दू जाति

यह जाति शांति संयम से जीती आई । यह जाति अमन के स्वप्न संजोती आई । मस्तक पर शीतल चन्दन तिलक लगाकर , यह जाति बांधती ढीली धोती आई । लेकिन जब कोई दुर्योधन उन्मादी । मंचों पर चढ़ गाली देने का आदी । सब शांतिप्रयासों को ठुकराया करता । हर समय युद्ध का शंख बजाया करता । यह पाँच हाँथ का जाट बना करती है । वामन से तुरत विराट बना करती है । जब अनुनय विनय नहीं शासक सुन पाते । ऊँचे मंचों पर चढ़कर गाल बजाते । जब दुर्विनीत शिशुपाल बहुत पगलाता । संयत केशव को आंदोलित कर जाता । तब अपराधी का न्याय किया जाता है । केवल धड़ से शिर काट दिया जाता है । खर दूषण सत्ता से तमगे पाते हैं । जब राष्ट्रयज्ञ विध्वंस किये जाते हैं । सत्ता की सूर्पनखा के गलत इरादे । चाहे उसके ही नाक कान कटवादे । जब सियाहरण करवा दे मृग सोने का, या बिके हाथ जनता पर बम बरसा दें । आमंत्रण रण का स्वीकारा जाता है । निश्चय ही तब रावण मार जाता है । जब कभी न्याय पर चलते तेज दुधारे । वन - वन फिरते रहते पांडव बंजारे । जब भीष्म द्रोण कृप का चिंतन बिक जाता । शकुनि के पांसो पर शासन टिक जाता । तब क्रूर समय की गति मोड़ी जाती है ।...